Main Page Anya Jyotirlinga Photo Gallery Ujjaincity Tyohar Sampark
 
 
         
         
         
         
         
         
         
    धर्मशाला जानकारी  
    भस्‍मआरती नि‍यम  
       पूजन/अभिषेक  
 
 
 
 

1

ज्योतिर्लिंग की महाकालेश्वर की पूजन-अर्चन के क्रम से परंपरा से श्रीकृष्ण विद्या गुरू महर्षि सान्दीपनि वंश से प्रसिद्ध व्यास परिवार से धर्मस्य नेमनूकदार 4 पुजारी परिवार है।

2

देवस्व पूजारी के 15 परिवार है।

3

दशनामी सन्यासी शैवमतावलम्बी महानिर्वाणी अखाड़े के महन्त भी पूजन परंपरा के अंग है।

4

महाकाल मंदिर परिसर में धार्मिक विधि पूजन, अभिषेक, जप आदि के लिये 20 परिवार पुरोहित ;पंडोंद्ध के हैं। नगर के अन्य विद्वान पुरोहित वर्ग भी अपने-अपने यजमानों की पूजन आदि मंदिर की व्यवस्था और मर्यादा के अंतर्गत कराते हैं।

नेमूनकदार पुजारी

1

पंडित आनन्दशंकर सुपुत्र स्व पं संकर्षण जी व्यास

2

पं सत्यनारायण सुपुत्र स्व श्री नागेश्वरजी व्यास

3

पं राधेश्याम सुपुत्र श्री मणिशंकरजी शास्त्री

4

पु शंकरलाल सुपुत्र श्री बाबूलाल जी व्यास

देवस्य पुजारी

1

पुजारी श्री राजेश शर्मा

2

पुजारी श्री घनश्याम पिता श्री रामचन्द्रजी शर्मा

3

पुजारी श्री कृष्ण पिता श्री श्रीवल्लभजी शर्मा

4

पुजारी श्री अमर शर्मा पिता श्री दिनेश शर्मा

5

पुजारी श्री विजय पिता श्री प्रेमनारायणजी शर्मा

6

पुजारी श्री तेजनारायण पिता श्री कन्हैयालालजी शर्मा

7

पुजारी श्री विजय शंकर

8

पुजारी श्री चन्द्रमोहन पिता श्री फूंदीलालजी शर्मा

9

पुजारी श्री गणेशनारायण पिता श्री महादेवजी शर्मा

10

पुजारी श्री दिलीप पिता श्री सुरेशचन्द्र शर्मा

11

पुजारी श्री संजय पिता श्री गणेशनारायणजी शर्मा

12

पुजारी श्री अजयकुमार पिता श्री शेषनारायणजी शर्मा

13

पुजारी श्री शांति कुमार मालवीय

14

पुजारी श्री कैलाश पिता श्री शिवनारायणजी शर्मा

15

पुजारी श्री दिनेश पिता श्री सदाशिवजी शर्मा

16

पुजारी श्री कमल शर्मा

महानिर्वाणी अखाड़े के श्री महन्त

दशनामी सन्यासी शैवमतावलम्बी महानिर्वाणी अखाड़े के श्रीमहन्त प्रकाशपुरीजी महाराज हैं।भस्मारती में भस्म श्रृंगार की व्यवस्था महन्तजी के माध्यम से होती है। मंदिर के प्रथम तल पर स्थित ओंकारेश्वर तथा तीसरे तलपर स्थित नागचंद्रेश्वर की पूजन व्यवस्था भी महन्तजी के द्वारा होती है। भस्मारती पूजन में नेमनूकदार पूजारी, देवस्थ पूजारी और महन्तजी के द्वारा परस्पर समन्वय से अपनी-अपनी परंपरा अनुसार पूजन-अर्चन की जाती